सच्चाई दिखाती कविता। Hindi poem

"मन्दिर लगता आडंबर ,  और मदिरालय में खोए हैं ," "भूल गए कश्मीरी  पंडित ,  और अफजल पे रोए हैं........" "इन्हें गोधरा नहीं दिखा ,  गुजरात दिखाई देता है ," "एक पक्ष के लोगों का ,  जज्बात दिखाई देता है........" "हिन्दू को गाली देने का ,  मौसम बना रहे हैं ये ," "धर्म सनातन पर हँसने को ,  फैशन बना रहे हैं ये......." "टीपू को सुल्तान मानकर ,  खुद को बेच कर भूल गए ," "और प्रताप की खुद्दारी की ,  घास की रोटी भूल गए......." "आतंकी की फाँसी इनको ,  अक्सर बहुत रुलाती है ," "गाय माँस के बिन भोजन की ,  थाली नहीं सुहाती है......." "होली आई तो पानी की ,  बर्बादी पर ये रोते हैं ," "रेन डाँस के नाम पर ,  बहते पानी से मुँह धोते हैं........" "दीवाली की जगमग से ही ,  इनकी आँखें डरती हैं ," "थर्टी फर्स्ट की आतिशबाजी ,  इनको क्यों नहीं अखरती है......." "देश विरोधी नारों को ,  ये आजादी बतलाते हैं ," "राष्ट्रप्रेम के नायक संघी ,  इनको नहीं सुहाते हैं...........

अर्णब गोस्वामी। Arnab Goswami and republic Bharat

अर्णब गोस्वामी कोई TRP चोर नहीं। बल्कि स्वतंत्र भारत में पत्रकारिता के स्वर्णिम युग की वापसी का शंखनाद है अर्णब गोस्वामी।

अपने उपरोक्त मत के पक्ष में सबसे पहले आप मित्रों को इन दो तथ्यों से परिचित कराना आवश्यक है।

इसी वर्ष 23 अप्रैल को एस गुरूमूर्ति जी ने अर्णब गोस्वामी के लिए कहा था कि...

अर्णब गोस्वामी धीरे धीरे उन्हीं रामनाथ गोयनका और तत्कालीन इंडियन एक्सप्रेस का स्थान ले रहे हैं जिन्होंने दिखाया था कि नकली गांधीयों को भी चुनौती दी जा सकती है।

एस गुरूमूर्ति जी की उपरोक्त टिप्पणी को अर्णब गोस्वामी की पत्रकारिता के लिए मैं सबसे बड़ा सम्मान सबसे बड़ा प्रमाणपत्र मानता हूं। 1987 से 2020, इस पूरी 33 वर्ष की समयावधि के दौरान एस गुरूमूर्ति जी ने कभी किसी पत्रकार या मीडिया संस्थान की तुलना रामनाथ गोयनका से नहीं की। इसका ठोस कारण भी है। 1986 में स्व रामनाथ गोयनका ने तत्कालीन भारतीय राजनीति के सर्वशक्तिमान परिवार और पार्टी के भ्रष्टाचार के विरुद्ध जिस निर्भीकता के साथ शंखनाद किया था। वैसा कोई दूसरा उदाहरण उससे पहले कभी नहीं देखा गया था। उसके बाद भी कभी नहीं देखा गया। 1986-87 में चित्रा सुब्रह्मण्यम के साथ मिलकर एस गुरूमूर्ति ने देश के समक्ष बोफोर्स रिश्वत कांड की परतें उधेड़ कर रख दी थीं। इंडियन एक्सप्रेस अखबार में चित्रा सुब्रह्मण्यम की रिपोर्टों और एस गुरूमूर्ति जी के तीखे धारदार तथ्यात्मक लेखों के कारण ही सोनिया गांधी के बहुत करीबी इटैलियन दोस्त ओतावियो क्वात्रोच्चि समेत कई लोगों के खिलाफ़ घूसखोरी दलाली की रिपोर्ट दर्ज हुई थी।

इंडियन एक्सप्रेस के मालिक रामनाथ गोयनका द्वारा निर्भीक पत्रकारिता को अभूतपूर्व संरक्षण देने की प्रतिबद्धता के फलस्वरूप ही गांधी परिवार के भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रचंड  शंखनाद हुआ था... इस ज़ंग में गोयनका जी के मुख्य सेनापति रहे एस गुरूमूर्ति जी को राजीव गांधी ने जेल तक भेज दिया था।

नयी पीढी के लिए यह जानना आवश्यक है कि पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट एस गुरुमूर्ति का पहला प्यार पत्रकारिता ही है. वर्तमान में दक्षिण भारत की चर्चित पत्रिका तुगलक के वो सम्पादक हैं। एस गुरुमूर्ति जी सम्भवतः देश के राजनीतिक इतिहास में अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें अटल जी अपनी सरकार में और प्रधानमंत्री मोदी अपनी सरकार में मंत्री पद देकर अपनी टीम में शामिल करना चाहते थे। लेकिन सक्रिय राजनीति से आजीवन दूर रहने का वचन अपने आध्यात्मिक गुरू को बहुत पहले ही दे चुके गुरुमूर्ति जी ने दोनों ही बार मंत्री पद स्वीकारने से मना कर दिया था। लेकिन गंभीर आर्थिक मामलों पर प्रधानमंत्री मोदी उनसे गहन विचार विमर्श करते रहते हैं जिसका प्रचार गुरुमूर्ति कभी नहीं करते। देश की अर्थिक राजनीतिक स्थिति और उससे सम्बंधित सरकार की नीति और निर्णय को लेकर मेरे मन में जब भी कोई असमंजस या संशय उत्पन्न होता है तो मैं जानने का प्रयास करता हूं कि उन मुद्दों पर एस गुरूमूर्ति का क्या मत है. उसके बाद मेरा असमंजस या संशय पूरी तरह से समाप्त हो जाता है क्योंकि उनके मत को मैं शत प्रतिशत सत्य और सही मानता हूं। मेरे इस निष्कर्ष ने मुझे आजतक निराश भी नहीं किया है।

अब मेरा सवाल यह है कि... क्या ऐसा विलक्षण व्यक्तित्व किसी लोभ लालच या दबाव में अरनब गोस्वामी की पत्रकारिता की प्रशंसा कर सकता है? 


दूसरा तथ्य... 

IBN7 और ETV नेटवर्क को खरीद कर देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक न्यूज नेटवर्क NEWS18 का मालिक बने मुकेश अम्बानी ने लगभग 2 साल पहले 18 दिसम्बर 2018 को आयोजित रिपब्लिक के कार्यक्रम के मंच से बोलते हुए कहा था कि "अर्णब तुम्हारा रिपब्लिक न्यूजचैनल दुनिया के सर्वाधिक सफल मीडिया स्टार्टअप्स में से एक है। दो साल से भी कम समय में, मीडिया की दुनिया में इतनी जल्दी इतनी बड़ी सफ़लता पाना इतना आसान नहीं है। मैं यह बात इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैं मीडिया बिजनेस में हूं और मैं मीडिया बिजनेस को जानता हूं। अर्णब तुमने यह सिद्ध कर दिया है कि एक प्रतिभाशाली टीम को साथ लेकर उद्देश्यपूर्ण प्रतिबद्धता, निष्ठा के साथ जोश और जुनून से यदि कोई काम किया जाए तो आज के नए भारत में सफल होने से कोई रोक नहीं सकता अर्णब आज तुम युवा एवं नए उद्यमियों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन चुके हो।" 

मुकेश अम्बानी द्वारा उस दिन की गई उपरोक्त टिप्पणी कोई अपवाद मात्र नहीं थी। आप सबने मुकेश अम्बानी के उस इंटरव्यू की वह बहुचर्चित क्लिप भी जरूर देखी होगी जिसमें मुकेश अम्बानी ने राजदीप सरदेसाई से बहुत साफ शब्दों में कहा था कि... "मैं तुमको कभी गम्भीरता से नहीं लेता, जब मुझे मौका मिलता है तो मैं अर्णब को सुनता हूं।"

देश के सबसे बड़े धनकुबेर मुकेश अम्बानी के सबसे बड़े मीडिया साम्राज्य को पछाड़ कर नंबर वन बने अर्णब गोस्वामी की मुकेश अम्बानी जब सार्वजनिक रूप से ऐसी प्रशंसा करते हैं तो क्या रिपब्लिक चैनल और अर्णब गोस्वामी पैसा देकर दबाव डालकर मुकेश अम्बानी से अपनी प्रशंसा कराते हैं? जिसे ऐसा लगता है उसे किसी पागलखाने में अपना ईलाज कराना चाहिए।

उपरोक्त दोनों उदाहरण यह समझाने के लिए पर्याप्त हैं कि अर्णब गोस्वामी कोई TRP चोर नहीं। बल्कि स्वतंत्र भारत में पत्रकारिता के स्वर्णिम युग की वापसी का वो शंखनाद है अर्ण गोस्वामी। जो देश के जनमानस के दिलों पर एकछत्र राज कर रहा है।


आभार:

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