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Showing posts from October, 2020

सच्चाई दिखाती कविता। Hindi poem

"मन्दिर लगता आडंबर ,  और मदिरालय में खोए हैं ," "भूल गए कश्मीरी  पंडित ,  और अफजल पे रोए हैं........" "इन्हें गोधरा नहीं दिखा ,  गुजरात दिखाई देता है ," "एक पक्ष के लोगों का ,  जज्बात दिखाई देता है........" "हिन्दू को गाली देने का ,  मौसम बना रहे हैं ये ," "धर्म सनातन पर हँसने को ,  फैशन बना रहे हैं ये......." "टीपू को सुल्तान मानकर ,  खुद को बेच कर भूल गए ," "और प्रताप की खुद्दारी की ,  घास की रोटी भूल गए......." "आतंकी की फाँसी इनको ,  अक्सर बहुत रुलाती है ," "गाय माँस के बिन भोजन की ,  थाली नहीं सुहाती है......." "होली आई तो पानी की ,  बर्बादी पर ये रोते हैं ," "रेन डाँस के नाम पर ,  बहते पानी से मुँह धोते हैं........" "दीवाली की जगमग से ही ,  इनकी आँखें डरती हैं ," "थर्टी फर्स्ट की आतिशबाजी ,  इनको क्यों नहीं अखरती है......." "देश विरोधी नारों को ,  ये आजादी बतलाते हैं ," "राष्ट्रप्रेम के नायक संघी ,  इनको नहीं सुहाते हैं...........

सच्चाई दिखाती कविता। Hindi poem

"मन्दिर लगता आडंबर ,  और मदिरालय में खोए हैं ," "भूल गए कश्मीरी  पंडित ,  और अफजल पे रोए हैं........" "इन्हें गोधरा नहीं दिखा ,  गुजरात दिखाई देता है ," "एक पक्ष के लोगों का ,  जज्बात दिखाई देता है........" "हिन्दू को गाली देने का ,  मौसम बना रहे हैं ये ," "धर्म सनातन पर हँसने को ,  फैशन बना रहे हैं ये......." "टीपू को सुल्तान मानकर ,  खुद को बेच कर भूल गए ," "और प्रताप की खुद्दारी की ,  घास की रोटी भूल गए......." "आतंकी की फाँसी इनको ,  अक्सर बहुत रुलाती है ," "गाय माँस के बिन भोजन की ,  थाली नहीं सुहाती है......." "होली आई तो पानी की ,  बर्बादी पर ये रोते हैं ," "रेन डाँस के नाम पर ,  बहते पानी से मुँह धोते हैं........" "दीवाली की जगमग से ही ,  इनकी आँखें डरती हैं ," "थर्टी फर्स्ट की आतिशबाजी ,  इनको क्यों नहीं अखरती है......." "देश विरोधी नारों को ,  ये आजादी बतलाते हैं ," "राष्ट्रप्रेम के नायक संघी ,  इनको नहीं सुहाते हैं...........

लुटेरा ब्राह्मण, Hindi kahani

ब्राह्मणों के प्रति समाज की बिमार मानसिकता:- यह आलेख मैंने कहीं से पाया l पढ़ने के बाद पोस्ट करने से अपने को रोक नहीं पाया l वृतांत इस प्रकार से है l अरे तुम तो लुटेरे हो ..... एक फोन आया पंडित जी एक शादी करानी है .... मैने कहा.... ठीक है पहुँच जाऊंगा .... 7-00 बजे शाम को ही आ जाइएगा ऐसा उन्होंने बोला .... मैं समय पर पहुँच गया पर कोई भी तैयार नहीं था ... इंतजार करते करते 10.00 बजे  रात को बारात घर से निकली .... 11-00 बजे मंडप में पहुंचे तो पता चला कि जो मैने सामान मंगाया था वो एक भी सामान नहीं आया था .... भूल गये ...अभी मंगाते है ... इंतजार करते करते रात को 2-00 बजे फेरों के लिए आये ....  आते ही बोले पंडित जी फेरे अच्छे से करवाना .... वैदिक विधि विधान से विवाह संपन्न हुआ .... सुबह के 5.00 बज गए .... मैने  कहा कि अब मै चलता हूँ ...दक्षिणा दीजिये .... सब का मुह देखने लायक था कि मैने उनकी जमींन लिखने को बोल दिया हो .... आप विश्वाश नहीं करेंगे ... लड़के के पिता ने जेब से 100 का नोट निकाल कर मुझे दक्षिणा में दिया .... और इतना ही लड़की के पिता ने भी दिया ....यानि 10 घंटों की मेहन...

लव जिहाद की फोटो। Love jihad / Jehad

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 1) 2) 3) 4) सौ से ज्यादा लव जिहाद के मामले जानने के लिए नीचे के लिंक से पीडीएफ फाइल डाउनलोड कर सकते हैं। डाउनलोड

महानालयक अमिताभ बच्चन का दोगलापन

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कौन बनेगा करोड़पति में मुस्तफा पर्दा वाला नाम का एक व्यक्ति आया और उसके परिवार की महिलाएं हिजाब पहन कर के आई..... लेकिन अमिताभ बच्चन ने और किसी भी व्यक्ति ने उनके हिज़ाब को लेकर के कोई  टिप्पणी नहीं की.... लेकिन याद है जब रूमा देवी "सिर पर पल्ला" रखकर के कौन बनेगा करोड़पति में आई थी (वही एपिसोड जिसमें दोनों की अल्पज्ञता का बोध हुआ था) तो  सोनाक्षी सिन्हा ने और अमिताभ बच्चन ने सबसे पहले उनके पल्ले को लेकर टिप्पणियां की थी और कहा था कि यह  पर्दा प्रथा महिलाओं को तरक्की करने में बाधक है। लेकिन अब कौन बनेगा करोड़पति में स्वयं अमिताभ बच्चन और दूसरे किसी भी व्यक्ति ने हिज़ाब के कारण से किसी की तरक्की में बाधा बनने का कोई शब्द नहीं निकाला। एक ही प्रकार की दो चीजों के संबंध में एक ही आदमी के द्वारा एक ही स्थान पर  दो मत कैसे हो सकते है। समझ में नहीं आ रहा अगर आपकी समझ में आया हो तो जवाब अवश्य दें। इंडिया के कथित बुद्धिजीवियों और फिल्मी भांडो का दोगलापन इसे ही कहते हैं। सदी का महानालायक अमिताभ बच्चन। आभार:

मार्क्सवादी क्रान्ति। Marxsvadi kranti

अभी पुष्पा को कालेज आये चार ही दिन हुए थे कि उसकी मुलाक़ात एक  क्रांतिकारी से हो गयी. लम्बी कद का एक सांवला सा लौंडा...ब्रांडेड जीन्स पर फटा हुआ कुरता पहने क्रान्ति की बोझ में इतना दबा था कि उसे दूर से  देखने पर ही यकीन हो जाता था कि इसे नहाये मात्र सात दिन  हुये  हैं..... .बराबर उसके शरीर से क्रांति की गन्ध आती रहती थी... लाल गमछे के साथ झोला लटकाये सिगरेट फूंक कर क्रान्ति कर ही रहा था तब तक.... पुष्पा ने कहा..."नमस्ते भैया.. .. "हुंह ये संघी हिप्पोक्रेसी."..काहें का भइया और काहें का  नमस्ते?..हम इसी के खिलाफ तो लड़ रहे हैं...प्रगतिशीलता की लड़ाई...ये घीसे पीटे संस्कार...ये मानसिक गुलामी के सिवाय कुछ नहीं.....आज से सिर्फ लाल सलाम साथी कहना। पुष्पा ने सकुचाते हुए पूछा.."आप क्या करते हैं ..क्रांतिकारी ने कहा.."हम क्रांति करते हैं....जल,जंगल,जमीन की लड़ाई लड़ते हैं..शोषितों वंचितों की आवाज उठातें हैं..  क्या तुम मेरे साथ क्रान्ति करोगी? पुष्पा ने सर झुकाया और धीरे से  कहा...."नहीं मैं यहाँ पढ़ने आई हूँ...कितने अरमानों से मेरे किसान पिता ने मुझे यहाँ भेजा है..प...

KBC देश विरोधी शो, देश विरोधी अमिताभ बच्चन।

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देशविरोधियों, अर्बन नक्सल्स, वामपंथियों और जिहादियों के प्रति जानता के दिमाग को व्हाइट वॉस करने के लिए कौन बनेगा करोड़पति के शो में एक एजेंडा चलाया जा रहा है। जिसमें अमिताभ बच्चन उर्फ इन्कलाब श्रीवास्तव की भी अहम भूमिका है। पहले की मूवी में भी अमिताभ बच्चन के किरदारों को देख कर आप भली भांति समझ सकते हैं कि कैसे उसमें हिन्दू धर्म पर सवाल उठाए गए और हिन्दू धर्म को बदनाम करने की साजिश रची गई। जबकि उसी फिल्मों में इस्लाम और मुसलमान को सच्चा और ईमानदार दिखाया गया। इस बात से भी सभी भलीभांति परिचित होंगे की कैसे कांग्रेस पार्टी से अमिताभ बच्चन के प्रेम भरे सम्बन्ध रहे हैं। और अमिताभ बच्चन की पत्नी के स्वभाव से भी सभी परिचित ही होंगे। अमिताभ बच्चन बॉलीवुड का वह मौन मोहन है जिसको बस एड फिल्में और मूवी करवा लो, इसके अलावा उसका किसी चीज से कोई लेना देना नहीं। न तो सुशांत केस में कुछ बोलना, न ड्रग्स पर कुछ बोलना और न ही किसी गलत विषय वस्तु का विरोध करना। यही सब कारण है कि kbc का लोग बहिष्कार कर रहे हैं और उसकी टीआरपी काफी गिर चुकी है। जानता जाग रही है, उन्हें कोई बहका नहीं सकता। देर सवेर पोल खुल ह...

CAA, NRC, NPR तथा Population Control Bill आदि अनिवार्य है।

अगर आपको गणित आती है तो बताइए 1947 से 2017 यानी 70 साल में भारत मे रुक गए मुसलमान की आवादी 3 करोड़ से दस गुणा बढकर 30 करोड़ हो गयी है तो हमारे बेटे के ही जीवन काल यानी अगले 70 साल (2090) में उनकी आबादी कितनी होगी ? फिर से दस गुणा यानि 300 करोड़ और सोचिये तब.... 1 - हमारी सम्पत्ति का क्या होगा ? 2 - हमारे व्यवसाय का क्या होगा ? 3 - हमारी नौकरी का क्या होगा ? 4 - हमारे मन्दिरों का क्या होगा ? 5 - स्कूल गयी हमारी बेटी का क्या होगा ? 6 - हमारे संविधान का क्या होगा ? 7 - हमारे जातीय अहंकार का क्या होगा ? 8 - हमारे आरक्षण का क्या होगा ? 9 - हमारी नेतागिरी का क्या होगा ? 10 - हमारी जाती के लोगों का क्या होगा ? क्या तब हमारी स्वार्थी बुद्धि कोई समाधान कर पायेगी? नहीं ना... तो फिर वही होगा जो काश्मीरी हिंदूओ का हुआ था। उनके पास फिर भी शरण लेने के लिए भारत देश था* आपके पास क्या है ??? इसीलिए भावी पीढ़ी की सलामती के लिये  CAA, NRC, NPR तथा Population Control Bill आदि अनिवार्य है।  कृपया सबको जागरूक करें व एकजुट होकर सरकार का साथ दें। आभार:

हाथरस मामले में SIT को बड़ी सफलता। Hathras case Uttar Pradesh

हाथरस केस में एसआईटी ने बहुत बड़ा पर्दाफाश किया है और पीड़ित लड़की की नकली भाभी को खोजने के लिए जगह-जगह दबिश दी जा रही है। दरअसल जब हाथरस की लड़की को उसके ही घर घरवालों ने मारा पीटा और वह लड़की घायल हो गई, यह खबर नक्सलियों को जब लगी तब नक्सलियों ने जबलपुर की रहने वाली एक महिला जो पीएचडी है और नक्सली संगठनों से जुड़ी है उसे 16 सितंबर को पीड़िता के घर भेज दिया और वह महिला साड़ी पहनकर घुंघट ओढ़ कर बकायदा 25 सितंबर तक उनके घर में रही उसी ने परिवार वालों को पूरा पाठ पढ़ाया और उन्हें सिखाया कि उन्हें क्या बोलना है कैसे बोलना है। उसी ने घर वालो को सिखाया  कि अगर तुम सवर्णों पर यह आरोप लगा दो तब तुम्हें करोड़ों रुपए मिलेंगे राहुल गांधी से लेकर सोनिया गांधी यहां आएंगे। इतना ही नहीं इस नकली भाभी के नाम पर बाहर से हवाला से कई पैसे आने के ही सुबूत एसआईटी को मिले हैं। कल पीड़ित परिवार भी एसआईटी के सामने यह स्वीकार कर लिया है कि जिसे वह मृतक लड़की की भाभी बनाकर पेश कर रहे थे वह उनकी भाभी नहीं थी। मजे की बात देखी है बड़े-बड़े पत्रकार चाहे दीपक चौरसिया हो चाहे चित्रा त्रिपाठी हो सब उसका इंटरव्यू घ...

भारतीय बौद्धिकता को धिम्मीवाद की दीमक! Slave ness in islamic world.

इस्लाम में धिम्मी (dhimmi ([ˈðɪmːiː]; अरबी: ذمي , समूह में أهل الذمة अह्ल अल-धिम्माह; ओटोमान तुर्की एवं उर्दू में जिम्मी) उस व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को कहते हैं जो मुसलमान नहीं है और शरियत कानून के अनुसार चलने वाले किसी राज्य की प्रजा है। भारतीय मीडिया में एक ही तरह की घटनाओं पर, मुस्लिम या हिन्दू मामलों में दोहरे मानदंड अपनाने की व्याख्या एक ही अवधारणा कर सकती है – ‘जिम्मी’ (dhimmi) मानसिकता। अफ्रीकी मूल की लेखिका "बात ये’ओर" ने इस पर गंभीर पुस्तक लिखी है, Islam and Dhimmitude (‘इस्लाम एंड जिम्मीच्यूड’)। मुख्यतः अरबी पृष्ठभूमि पर लिखी इस पुस्तक से वह मानसिकता ठीक-ठीक समझी जा सकती है, जिस से अधिकांश भारतीय नेता, बुद्धिजीवी ग्रस्त हैं। अरबी शब्द ‘जिम्मा' का अर्थ है करार, जिस से जिम्मेदारी शब्द भी बना है। वह करार जो सदियों पहले इस्लाम द्वारा अपने राज्य में कुछ ईसाइयों, यहूदियों को जिंदा रहने देने की शर्त के रूप में एकतरफा तय किया गया था। (हालाँकि वह छूट बौद्धों, मूर्तिपूजकों के लिए नहीं थी – उन्हें इस्लाम या मौत के बीच एक ही चुनना था।) खलीफा उमर के शासन में, सन् 634 क...

भूली-बिसरी यादें जिनको भुला दिया सबने।

हिन्दू बहुत भुलक्कड़ जीव है, जो हिन्दू नरसंहारों और अपने ऊपर हुए जुर्मों को बड़ी आसानी से भूल जाता है। कभी कभी दोगले कांग्रेसी भड़वे की कही बातें भी भूल जाता है। कुछ नज़्में नीचे याद दिलाए गए हैं। १. यूपी के लोग भिखारी होते हैं- (राहुल गाँधी, कांग्रेस उपाध्यक्ष) २. पंजाब के 70% लोग नशेड़ी होते हैं– (राहुल गाँधी, कांग्रेस उपाध्यक्ष) ३. 90% बलात्कार तो लड़की की मर्जी से होते हैं– धरमवीर गोयत (हरियाणा कांग्रेस,  प्रवक्ता) ४. बीवी पुरानी हो जाये तो मजा नहीं आता– (श्रीप्रकाश जैसवाल, कोयला मंत्री , कांग्रेस) ५. महंगाई अच्छी है, ये तो ऐसे ही बढ़ेगी– (पी चिदंबरम कांग्रेस) ६. बलात्कार तो हर जगह होता है– (रेणुका चौधरी, कांग्रेस) ७. सोनिया जी कहेंगी तो झाड़ू भी लगाऊंगा - (भक्त चरणदास, कांग्रेस) ८. पाकिस्तान के हिंदुओं को अपने ऊपर हो  रहे अत्याचार के सबूत देने होंगे– (सुशील शिंदे, कांग्रेस) ९. मैं सोनिया जी के लिए जान तक दे दूँगा– (सलमान खुर्शीद, कांग्रेस) १०. बोफोर्स की ही तरह कोयला घोटाला भी जनता भूल जायेगी– (सुशील शिंदे, कांग्रेस) ११. हमारे सैनिकों को पाकिस्तान की सेना ने नहीं बल्कि उन...

चुनाव में भांड मीडिया। Lutyens media in elections.

टी.वी. चैनल वाले चुनावी कैलकुलेशन करते समय, क्षेत्रवार जनसंख्या प्रतिशत करके बताते हैं तो कुछ इस प्रकार से दिखाते हैं कि, इस चुनाव क्षेत्र में: 28% मुस्लिम 10% ब्राह्मण  08% ठाकुर 04% जाट 05% लोध राजपूत 16% दलित 12% कुर्मी  02% सिक्ख  15% अन्य, जाति के मतदाता हैं। वो कभी यह क्यों नहीं दिखाते कि,  इस क्षेत्र में 72% हिन्दुओं के अलावा  16% सुन्नी और 12% शिया हैं  अब से ये बदलाव आना चाहिए और हम और आप वाट्सअपिए करके दिखाएंगे।। हिन्दू --------------- 72 % कसाई -------------- 01 %  गद्दी ----------------- 02 %  अंसारी ------------- 02 %  हज्जाम ------------- 02 %  कायमखानी -------- 02 % सय्यद -------------- 02 %  पठान --------------- 02 %  शेख ----------------- 03 %  शैफी ----------------- 02 % मनिहार ------------ 01 % सलमानी ( धोबी) -- 01 % इदरीसी ( दर्जी) --- 01 % मंसूरी (धुनें) ------- 0.5 % बाबर्ची ------------- 01 % मिरासी ------------ 0.5 % भांड ---------------- 01 % अन्य --------------- 04 % कभी देखा है किसी ने ऐसा टी.वी....

सुन लो नपुंसकों, मेरा वोट मोदी जी को। My vote goes to Modi ji and BJP

मुझे अच्छी तरह याद है कि जिस समय राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने वाले थे तो किस तरह कुछ "पेड मठाधीशों" द्वारा लोगों को सवर्णों के नाम पर भड़काया गया था और उन्हें बहुत ही चालाकी से " नोटा " दबा के भाजपा को सबक सिखाने के लिए कन्विंस किया गया था। इस बारे में तर्क दिया गया था कि, भाजपा सवर्णों के साथ भेदभाव करती है। इस बारे में चुटियों द्वारा इतना हल्ला मचाया गया कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में बीजेपी बहुत ही कम मार्जिनल वोट से हार गई। इस चुनावी नतीजों के बाद भी आंकड़ों को प्रदर्शित करते हुए बहुत ही बेहूदे तरीके से ये बताया गया कि देखो, हमने नोटा ने दम पर बीजेपी को हरा दिया। तो, बहुत ही खुशी की बात है कि बीजेपी को हरा दिया!! लेकिन.... बीजेपी हारने के बाद हुआ क्या ??? फडणवीस, मामा जी या वसुंधरा राजे या फिर मोदी जी क्या रोड पर आ गए ? भीख माँगने लगे सड़क पर ? अक्ल के अंधो, अगर राज्य में हुए अपराध के लिए उस राज्य के मुख्यमंत्री को दोषी माना जाए तो.. (जैसे कि गुजरात दंगे के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी जी और अभी हाथरस कांड के लिए योगी जी को...

आदत ही पहचान है। Habits can identify the people. Hindi kahani

एक राजा के दरबार मे एक अजनबी इंसान नौकरी मांगने के लिए आया। उससे उसकी क़ाबलियत पूछी गई, तो वो बोला- "मैं आदमी हो चाहे जानवर, शक्ल देख कर उसके बारे में बता सकता हूँ।           राजा ने उसे अपने खास "घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज" बना दिया। कुछ दिनों बाद राजा ने उससे अपने सब से महंगे और मनपसन्द घोड़े के बारे में पूछा, उसने कहा- "नस्ली नही  हैं।"            राजा को हैरानी हुई, उसने जंगल से घोड़े वाले को बुला कर पूछा, उसने बताया, घोड़ा नस्ली तो हैं, पर इसकी पैदायश पर इसकी माँ मर गई थी, ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पला है।            राजा ने अपने नौकर को बुलाया और पूछा तुम को कैसे पता चला के घोड़ा नस्ली नहीं है ?" उसने कहा- "जब ये घास खाता है तो गायों की तरह सिर नीचे करके, जबकि नस्ली घोड़ा घास मुँह में लेकर सिर उठा लेता हैं।            राजा उसकी काबलियत से बहुत खुश हुआ, उसने नौकर के घर अनाज, घी, मुर्गे, और अंडे बतौर इनाम भिजवा दिए। और उसे रानी के महल में तैनात कर दिया।  ...

अर्णब गोस्वामी। Arnab Goswami and republic Bharat

अर्णब गोस्वामी कोई TRP चोर नहीं। बल्कि स्वतंत्र भारत में पत्रकारिता के स्वर्णिम युग की वापसी का शंखनाद है अर्णब गोस्वामी। अपने उपरोक्त मत के पक्ष में सबसे पहले आप मित्रों को इन दो तथ्यों से परिचित कराना आवश्यक है। इसी वर्ष 23 अप्रैल को एस गुरूमूर्ति जी ने अर्णब गोस्वामी के लिए कहा था कि... अर्णब गोस्वामी धीरे धीरे उन्हीं रामनाथ गोयनका और तत्कालीन इंडियन एक्सप्रेस का स्थान ले रहे हैं जिन्होंने दिखाया था कि नकली गांधीयों को भी चुनौती दी जा सकती है। एस गुरूमूर्ति जी की उपरोक्त टिप्पणी को अर्णब गोस्वामी की पत्रकारिता के लिए मैं सबसे बड़ा सम्मान सबसे बड़ा प्रमाणपत्र मानता हूं। 1987 से 2020, इस पूरी 33 वर्ष की समयावधि के दौरान एस गुरूमूर्ति जी ने कभी किसी पत्रकार या मीडिया संस्थान की तुलना रामनाथ गोयनका से नहीं की। इसका ठोस कारण भी है। 1986 में स्व रामनाथ गोयनका ने तत्कालीन भारतीय राजनीति के सर्वशक्तिमान परिवार और पार्टी के भ्रष्टाचार के विरुद्ध जिस निर्भीकता के साथ शंखनाद किया था। वैसा कोई दूसरा उदाहरण उससे पहले कभी नहीं देखा गया था। उसके बाद भी कभी नहीं देखा गया। 1986-87 में चित्रा सुब्रह्...

मरता हिन्दू। Hindu dharma in danger

हिरण पूरे दिन घास खाने मे लगा रहता है, घास को प्रोटीन में बदलने में ही लगा रहता है।  दूसरी तरफ माँसाहारी जानवरों को जब तक भूख नहीं लगती बस आराम से पड़े रहते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि उनके लिए प्रोटीन का इंतजाम करने के लिए हिरण जो लगा हुआ है।  जब तक हिरण जिंदा है, जंगल में खूंखार जानवर मस्त सोते है पर हिरण जब कम होने लगते हैं तो ये भूखे खूंखार नए जंगल की तलाश करता है।  हिन्दू रूपी हिरणों ने बड़ी मेहनत से सोना, चांदी, हीरे, ज्ञान-विज्ञान इकट्ठा किया था, क्या हुआ?  एक खूंखार नस्ल साफ कर गई सब। ईरान लिया, अफगानिस्तान लिया, पाकिस्तान ले गये, कश्मीर लिया, बांग्लादेश लिया, केरल बंगाल और असम भी गया ही समझो।  उस नस्ल ने सिर्फ शिकारी के गुण विकसित किये हैं...  अब पाकिस्तान और बांग्लादेश में खाने पीने की भयंकर कमी आ रही है क्योंकि हिन्दू, पंजाबी, सिंधी जैसे हिरण कम हो चुके हैं जिनकी वजह से इकॉनोमी चल रही थी। शेष कार्य सिर्फ शरीयत को 100 प्रतिशत लागू करना है, जिसकी वजह से धीरे धीरे पाकिस्तान बांग्लादेश में हिरण खत्म हो रहे हैं और खूंखार नरभक्षी बढ़ रहे हैं। अब उन नरभक्...

हनुमानजी के चित्र को कहां लगाना चाहिए। Hanuman Ji

हनुमानजी का चित्र घर में कहां लगाएं:- श्रीराम भक्त हनुमान साक्षात एवं जाग्रत देव हैं। हनुमानजी की भक्ति जितनी सरल है उतनी ही कठिन भी। कठिन इसलिए की इसमें व्यक्ति को उत्तम चरित्र और मंदिर में पवित्रता रखना जरूरी है अन्यथा इसके दुष्परिणाम भुगतने होते हैं। हनुमानजी की भक्ति से चमत्कारिक रूप से संकट खत्म होकर भक्त को शांति और सुख प्राप्त होता है। विद्वान लोग कहते हैं कि जिसने एक बार हनुमानजी की भक्ति का रस चख लिया वह फिर जिंदगी में अपनी बाजी कभी हारता नहीं। जो उसे हार नजर आती है वह अंत में जीत में बदल जाती है। ऐसे भक्त का कोई शत्रु नहीं होता। आपने हनुमानजी के बहुत से चित्र देखे होंगे। जैसे- पहाड़ उठाए हनुमानजी, उड़ते हुए हनुमानजी, पंचमुखी हनुमानजी, रामभक्ति में रत हनुमानजी, छाती चिरते हुए, रावण की सभा में अपनी पूंछ के आसन पर बैठे हनुमानजी, लंका दहन करते हनुमान, सीता वाटिका में अंगुठी देते हनुमानजी, गदा से राक्षसों को मारते हनुमानजी, विशालरूप दिखाते हुए हनुमानजी, आशीर्वाद देते हनुमानजी, राम और लक्षमण को कंधे पर उठाते हुए हनुमानजी, रामायण पढ़ते हनुमानजी, सूर्य को निगलते हुए हनुमानजी, बाल हनु...

कांग्रेस का पतन नजदीक है। Congress party's end is near. Rahul Gandhi and priyanka Vadra Gandhi.

मीडिया के मोर्चे पर आप महसूस कर रहे होंगे कि कांग्रेस यूपी में बीजेपी पर कई मोर्चों पर हमला कर रही है। लेकिन अगर आप बारीकी से विश्लेषण करें, आपको मालूम पड़ेगा कि यह तो वास्तव में कांग्रेस पर गांधी परिवार के वर्चस्व को मजबूत कर रहा है, भाजपा के खिलाफ कुछ भी नहीं है। एक महीने पहले ही गांधी परिवार के खिलाफ भारी भीतर विद्रोह हुआ था और कांग्रेस के भीतर लगभग 23 नेता थे जो गैर गांधी कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव करना चाहते थे। इस एक महीने में क्या हुआ? पहले सोनिया गांधी ने चुपचाप उन सभी 23 नेताओं को सभी पदों से हटा दिया।  चेकआउट   गुलाम नबी आज़ाद, आनंद शर्मा, मनीष तिवारी, दिग्विजय सिंह, सचिन पायलट, अंबिका सोनी, सलमान खुर्शीद, मल्लिकार्जुन खड़गे, कपिल सिब्बल, आदि इन सभी को उनके पदों से हटा दिया गया है और उसके बाद ही विदेशी खिलाड़ियों में बदलाव की पुष्टि करने और धन की व्यवस्था करने के लिए गान्धी 15 दिनों के लिए विदेश गए। विदेशी सैर से आने के तुरंत बाद, गान्धी पप्पू और उसकी बहन को देश को अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के लिए किसान और हाथरस अभियान के ड्रामा करते हैं। जबरदस्त पैसे की बौछार के साथ। ...

हिन्दी भाषा। हिन्दी दिवस। Hindi kahani, Hindi language, Hindi diwas

अघोरी ने चिता चढ़े शव को ज्युं ही छुआ, शव जोर से चिल्लाया तो अघोरी घबराकर पीछे हटा और शव ठठा के हंस पड़ा फिर बोला, "ये क्रंदन सुन रहे हो अघोरी ?  ये तुम्हारी मातृभाषा हिन्दी हैI कितनी क्रुरता से इसे समाप्त किया जा रहा है, संस्कृत की तरह मृत प्रायः, कभी सोचा संस्कृत क्युँ समाप्त हुई और दुर्भावना क्या थी समाप्त करने की ?  सबसे उन्नत धर्म की जडें काट दी गई, संस्कृत समाप्त करके I आप अपने वेद, पुराण, ऊपनिषद आदि मूल भाषा में पढोगे नहीं तो समझोगे कैसे ?  समझोगे नहीं तो मनन कैसे करोगे ?  मनन नही करोगे तो अनुकरण कैसे करोगे ? ईसाईयों को अंग्रेजी आती है, वो बाइबिल पढ लेते हैं, मुस्लिम को उर्दू आती है, वो कुरान पढ लेते हैं I  कितना बडा षडयंत्र और तुम समझ न पाए, धीरे धीरे तुम्हारी भाषा गई और फिर तुम्हारे संस्कार गए! क्या इतना भयभीत हिन्दू समाज था कभी, जितना आज है ?  वो पौरूष वो उच्च मापदंड, वो जीवन के प्रति विवेक सब समाप्त हो गएI  अब हिन्दी मर रही है और तुम मौन हो ... निःशब्द नीरव निशा नग्न नृत्य कर रही है मौत का, संस्कृत से लेकर संस्कार की मृत्यु का और तुम मौन हो!...

TRP manipulation and Mumbai Police commissioner

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमजीत सिंह ने अभी प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि दो छोटे चैनल्स और रिपब्लिक टीवी के खिलाफ "TRP रेटिंग मैन्युपिलेशन" का मामला दर्ज कर करवाई की जा रही है। परमजीत सिंह की प्रेस कांफ्रेंस से कुछ नतीजे निकाले जा सकते हैं। मुंबई पुलिस अब "कॉरपोरेट वॉर" का टूल बन चुकी है। मैन्युपिलेशन के नतीजे मुंबई में लगे सिर्फ दो हजार टीआरपी बॉक्स से निकाले गए हैं। टीआरपी बॉक्स की इतनी मामूली संख्या से कई सौ करोड़ की "एडवर्टिजमेंट रेवेन्यू" को अपने पक्ष में कर लेने की बात सोचना भी मुंबई पुलिस के "दिमागी दिवालिएपन" को सार्वजनिक कर रहा है।  एडवरटाइजर दो-तीन सप्ताह की टीआरपी रेटिंग पर निर्णय नहीं लेते। रेटिंग में लंबे समय की स्थिरता के बाद एडवरटाइजर कोई निर्णय लेते हैं। परमजीत सिंह बार-बार केवल मुंबई में लगे टीआरपी बॉक्स की संख्या का जिक्र कर रहे थे, देशभर के बॉक्स की संख्या ना बताई, ना किसी पत्रकार ने पूछा। इससे आम दर्शक को समझ आता, रेटिंग से एडवर्टिजमेंट और एडवर्टिजमेंट से रेवेन्यू खींचने में दो हजार टीआरपी बॉक्स की क्या अहमियत है ? परमजीत सिंह का आरो...

गुलामी की खूंटियां। Slave Hindu. Hindi kahani.

एक अंधेरी रात में एक काफिला एक रेगिस्तानी सराय में जाकर ठहरा। उस काफिले के पास सौ ऊंट थे। उन्होंने खूंटियां गाड़कर ऊंट बांधे, किंतु अंत में पाया कि एक ऊंट अनबंधा रह गया है। उनकी एक खूंटी और रस्सी कहीं खो गई थी। अब आधी रात वे कहां खूंटी-रस्सी लेने जाएं! काफिले के सरदार ने सराय मालिक को उठाया - "बड़ी कृपा होगी यदि एक खूंटी और रस्सी हमें मिल जाती। 99 ऊंट बंध गए, एक रह गया–अंधेरी रात है, वह कहीं भटक सकता है।" बूढ़ा बोला- मेरे पास न तो रस्सी है, और न खूंटी, किंतु 1 युक्ति है। जाओ और खूंटी गाड़ने का नाटक करो और ऊंट को कह दो–सो जाए। सरदार बोला- अरे, कैसा पागलपन है??बूढ़ा बोला-" बड़े नासमझ हो, ऐसी खूंटियां भी गाड़ी जा सकती हैं जो न हों, और ऐसी रस्सियां भी बांधी जा सकती हैं जिनका कोई अस्तित्व न हो। अंधेरी रात है, आदमी धोखा खा जाता है, ये तो एक ऊंट है?" विश्वास तो नहीं था किंतु विवशता थी. उन्होंने गड्ढा खोदा, खूंटी ठोकी–जो नहीं थी। सिर्फ आवाज हुई ठोकने की, ऊंट बैठ गया। खूंटी ठोकी जा रही थी। रोज-रोज रात उसकी खूंटी ठुकती थी, वह बैठ गया। उसके गले में उन्होंने हाथ डाला, रस्सी बांधी। रस...

How Lutyens media react to Modi ji, satire.

How media interprets what Narendra Modi says: Reporter:- Sir, what do you eat during Navratri? Modi : I only eat one single fruit in this Navratri. Reporter :- PM Sir; which fruit will you Eat ? Modi:- Papaya NDTV :- Breaking news, Modi does not like Mangoes; Banana; etc.He only eats Papaya . Surjewala :- Modi like Papaya means Saffron in color. This means Saffronisation of food choice. Shekhar Gupta :- This means Modi is only promoting Hindutva . He does not like green fruits means he is against Muslims. This clearly shows Modi has no feelings for Muslims. Mamata - I will put a ban on papaya in Bengal . Rahul Gandhi:- My favorite Fruit is Banana . I will never eat Papaya . Barkha Dutt : The nation wants to know why Modi likes Papaya more than other fruits . Mehbooba Mufti :- Modi doesn't like kashmiri Apple .This is Modi’s tactic to usurp Kashmir. We will not allow this to happen. Yechuri:- Selecting an expensive fruit like Papaya shows Modi is pro- capitalist. We would as...

कोरोना और एकांतवास। Corona era changed the way of living.

बेटे की नेगेटिव रिपोर्ट, मां की जिंदगी की पॉजिटिव रिपोर्ट बन गयी। 10 दिन की जद्दोजहद के बाद एक आदमी अपनी कोरोना नेगेटिव की रिपोर्ट हाथ में लेकर अस्पताल के रिसेप्शन पर खड़ा था। आसपास कुछ लोग तालियां बजा रहे  थे, उसका अभिनंदन कर रहे थे। जंग जो जीत कर आया था वो। लेकिन उस शख्स के चेहरे पर बेचैनी की गहरी छाया थी। गाड़ी से घर के रास्ते भर उसे याद आता रहा "आइसोलेशन" नामक खतरनाक और असहनीय दौर का वो मंजर। न्यूनतम सुविधाओं वाला छोटा सा कमरा, अपर्याप्त उजाला, मनोरंजन के किसी साधन की अनुपलब्धता, कोई बात नहीं करता था और न ही कोई नजदीक आता था। खाना भी बस प्लेट में भरकर सरका दिया जाता था। कैसे गुजारे उसने  वे 10 दिन, वही जानता था। घर पहुचते ही स्वागत में खड़े उत्साही पत्नी और बच्चों को छोड़ कर वह शख्स सीधे घर के एक उपेक्षित कोने के कमरे में गया, जहाँ माँ पिछले पाँच वर्षों से पड़ी थी। माँ के पावों में गिरकर वह खूब रोया और उन्हें लेकर बाहर आया। पिता की मृत्यु के बाद पिछले 5 वर्षों से एकांतवास  (आइसोलेशन) भोग रही माँ से कहा कि माँ आज से आप, हम सब एक साथ एक जगह पर ही रहेंगे। माँ को भी बड़ा आश्च...

धर्म शुद्धिकरण। Dharma Shuddhikaran

जब तक हम धर्म का अपमान सहेंगे , धर्म द्रोही धर्म का अपमान अनवरत करते रहे। धर्म का अपमान रोकना है तो हमें एकजुट होकर अनैतिक कृत्यों का और अनैतिक कृत्यों में साथ देने वालों का विरोध करना होगा उनका बहिष्कार करना होगा। नवरात्र एक साधना पर्व है जिसमें पूर्ण सात्विक भाव से माता की आराधना की जाती है, देवी शक्ति की साधना की जाती है। परंतु वर्तमान में अधर्मीयों की गंदी सोच के कारण, हिन्दुओं के अज्ञान और घटिया षड्यंत्रों के कारण इस साधना पर्व को दूषित किया जा रहा है, हमारे धर्म का अपमान हो रहा है, और हमारी बहू बेटियों को लव जिहाद में फंसाया जा रहा है, उन्हें दूषित कर हमारे समाज को हमारे धर्म को कमजोर किया जा रहा है। हमें संकल्पित होकर धर्म के होते इस अपमान को रोकना होगा। केवल बातें करने से, हो हल्ला मचाने से हम यह सब नहीं कर पाएंगे। हमारे लिए आवश्यक है कि हम इसी नवरात्र से शुरू करें की जिस भी पंडाल में अनैतिक कृत्य हो रहे हैं, अभद्र गाने बजाने कर डांस हो रहे हैं  उनसे बात करें और उन्हें ऐसा करने से रोके। यदि कोई नहीं मानता तो हम संगठित होकर किसी हिंदू संगठन से सहायता लेकर उनका पुरजोर विरोध क...

दारा सिंह जी एक हिन्दू योद्धा। Bajrang dal karyakarta Dara Singh Ji

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बहुत से लोग इन्हें भूल गए होंगे। ये हैं "दारा सिंह," साल 1999 में बजरंग दल के विभाग संयोजक थे। जब उड़ीसा में ग्राहम स्टेंस हत्याकांड हुआ था तब बजरंग दल के दारा सिंह पर आरोप लगे थे। सारे विश्व की ईसाई मिशनरी एकजुट हो गई, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का "सेकुलर कैबरे" हुआ और दारा सिंह गिरफ्तार हो गए। आज 20 वर्षों के बाद भी दारा सिंह को कभी पैरोल या जमानत नहीं मिली, यहाँ तक की उनके माता-पिता की चिता को अग्नि देने के लिए भी पैरोल नहीं मिली। लाखों हिन्दुओं को ख़त्म कर देने वाले मिशनरी से लड़ाई लड़ने वाला योद्धा 20 वर्षों से जेल में बंद हैं। दारा सिंह पर 2 धर्म परिवर्तकों ग्राहम स्टेन्स और अरुल दास के साथ गौ हत्यारे शेख रहमान की हत्या का अभियोग चला था, जिसमें  उनको आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी थी। दारा सिंह के प्रत्येक प्रकरण की जांच केंद्र व् राज्य सरकार में मौजूद तात्कालिक कांग्रेस सरकार ने की थी, जिसका हिन्दू विरोधी रवैया सर्वविदित है। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर हों, या बंजारा जी का केस हो, काँग्रेस सरकार की घोर हिन्दू विरोधी मानसिकता का प्रमाण संसार देख चुका है। अतः दारा सिंह क...

योगी आदित्यनाथ जी। Yogi Adityanath ji, real story mahu riot

ये बात अक्टूबर 2005 की है, एक UP का माफिया है जिसका नाम मुख़्तार अंसारी है। वो खुली जीप में हथियार लहराते, मऊ में साम्प्रदायिक दंगा करवा रहा था और 3 दिन बीत चुका था दंगे को। उस वक़्त UP का CM मुलायम सिंह यादव था। और वह कई दफ़ा ये भी बोल चुका था कि, "मुझसे बड़ा गुंडा इस UP में नही है।" ये बात वो सिर्फ योगी जी के लिये बोलता था। जब दंगे का तीसरा दिन था तो प्रशासन और UP के CM इस दंगे पे कुछ भी नहीं कर रहे थे, मूक दर्शक बने बैठे थे। तब मऊ से 64 KM दूरी पे गोरखपुर में बैठे योगी जी को ये दंगा बर्दास्त न हुआ और वो BJP के सारे बड़े नेता अटल जी, आडवाणी जी, मुरली जी और राजनाथ जी को सीधा चुनौती दे दिये, अगर BJP के सारे कार्यकर्ता मेरे साथ मऊ नहीं गये तो परिणाम बहुत बुरा होगा।। दंगा तो मैं अपने बल पे भी रोक लूंगा पर ऐसे हत्यायों को अगर BjP पार्टी बस देख के चुप रहेगी तो मुझसे बर्दास्त न होगा और मैं BJP छोड़ दूँगा। BJP के सारे नेताओं को योगी जी के इस बात से पसीना आ गया, पर BJP के सारे नेता हिम्मत ही नही जुटा पा रहे थे इस दंगे को जा के रोकने का। वजह सिंर्फ़ एक था, CM मुलायम। क्योंकि इस BJP के सारे ...

गुरु गोविन्द सिंह जी। Guru Gobind Singh Ji.

7 अक्टूबर 1708 पुण्यतिथि:- दशमेश पिता गुरु गोविन्द सिंह जी। "सकल जगत में खालसा पंथ गाजे, जगे धर्म हिंदू सकल भंड भाजे।" खालसा पंथ के संस्थापक दशमेश पिता गुरु गोविन्द सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि कोटि नमन। गुरु गोविन्द सिंह सिख धर्म के दसवे और अंतिम गुरु थे। इनका जन्म २२ दिसंबर १६६६ ई में बिहार राज्य के पटना शहर में हुआ था। गुरु गोविन्द सिंह जी का मूल नाम गोविन्द राय था।गुरु गोविन्द सिंह सैनिको की संगति और सनातन धर्म की रक्षा के लिए खालसा पंथ की स्थापना के लिए प्रसिद्ध थे। गुरु गोविन्द सिंह जी के पिता का नाम गुरु तेग बहादुर तथा माता का नाम गुजरी जी था। १६७५ ई में गुरु तेग बहादुर ने कश्मीरी पंडितों के अनुरोध पर सनातन धर्म के अस्तित्व को बचाये रखने के लिए अपने प्राणो का बलिदान दिया था। तत्पश्चात ९ वर्ष की उम्र में गुरु गोविन्द सिंह जी ११ नवंबर १६७५ ई को राजगद्दी पर विराजमान हुए। २२,दिसंबर १६६६ को माता गुजरी ने गुरु गोविन्द सिंह जी को जन्म दिया था। गोविन्द सिंह बचपन से ही खिलौने की जगह कृपाण, कटार और धनुष-बाण से खेला करते थे। गुरु गोविन्द जी बचपन से ही शौर्य और साहसिक कार्यों ...

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हिन्दू धर्म का अपमान हिन्दू ही करते हैं। Hindus are responsible for their stupidity towards hindu dharma.

सन्त रविदास का वास्तविक स्वरूप।

कांग्रेस का पतन नजदीक है। Congress party's end is near. Rahul Gandhi and priyanka Vadra Gandhi.