सच्चाई दिखाती कविता। Hindi poem

"मन्दिर लगता आडंबर ,  और मदिरालय में खोए हैं ," "भूल गए कश्मीरी  पंडित ,  और अफजल पे रोए हैं........" "इन्हें गोधरा नहीं दिखा ,  गुजरात दिखाई देता है ," "एक पक्ष के लोगों का ,  जज्बात दिखाई देता है........" "हिन्दू को गाली देने का ,  मौसम बना रहे हैं ये ," "धर्म सनातन पर हँसने को ,  फैशन बना रहे हैं ये......." "टीपू को सुल्तान मानकर ,  खुद को बेच कर भूल गए ," "और प्रताप की खुद्दारी की ,  घास की रोटी भूल गए......." "आतंकी की फाँसी इनको ,  अक्सर बहुत रुलाती है ," "गाय माँस के बिन भोजन की ,  थाली नहीं सुहाती है......." "होली आई तो पानी की ,  बर्बादी पर ये रोते हैं ," "रेन डाँस के नाम पर ,  बहते पानी से मुँह धोते हैं........" "दीवाली की जगमग से ही ,  इनकी आँखें डरती हैं ," "थर्टी फर्स्ट की आतिशबाजी ,  इनको क्यों नहीं अखरती है......." "देश विरोधी नारों को ,  ये आजादी बतलाते हैं ," "राष्ट्रप्रेम के नायक संघी ,  इनको नहीं सुहाते हैं...........

आदत ही पहचान है। Habits can identify the people. Hindi kahani

एक राजा के दरबार मे एक अजनबी इंसान नौकरी मांगने के लिए आया। उससे उसकी क़ाबलियत पूछी गई, तो वो बोला- "मैं आदमी हो चाहे जानवर, शक्ल देख कर उसके बारे में बता सकता हूँ।

          राजा ने उसे अपने खास "घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज" बना दिया। कुछ दिनों बाद राजा ने उससे अपने सब से महंगे और मनपसन्द घोड़े के बारे में पूछा, उसने कहा- "नस्ली नही  हैं।" 

          राजा को हैरानी हुई, उसने जंगल से घोड़े वाले को बुला कर पूछा, उसने बताया, घोड़ा नस्ली तो हैं, पर इसकी पैदायश पर इसकी माँ मर गई थी, ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पला है। 

          राजा ने अपने नौकर को बुलाया और पूछा तुम को कैसे पता चला के घोड़ा नस्ली नहीं है ?" उसने कहा- "जब ये घास खाता है तो गायों की तरह सिर नीचे करके, जबकि नस्ली घोड़ा घास मुँह में लेकर सिर उठा लेता हैं। 

          राजा उसकी काबलियत से बहुत खुश हुआ, उसने नौकर के घर अनाज, घी, मुर्गे, और अंडे बतौर इनाम भिजवा दिए। और उसे रानी के महल में तैनात कर दिया। 

         कुछ दिनों बाद, राजा ने उस से रानी के बारे में राय मांगी, उसने कहा- "तौर तरीके तो रानी जैसे हैं लेकिन पैदाइशी नहीं हैं।" 

         राजा के पैरों तले जमीन निकल गई, उसने अपनी सास को बुलाया, मामला उसको बताया, सास ने कहा "हक़ीक़त ये हैं, कि आपके पिताजी ने मेरे पति से हमारी बेटी की पैदाइश पर ही रिश्ता मांग लिया था, लेकिन हमारी बेटी 6 माह में ही मर गई थी, लिहाज़ा हम ने आपके रजवाड़े से करीबी रखने के लिए किसी और की बच्ची को अपनी बेटी बना लिया।" 

         राजा ने फिर अपने नौकर से पूछा "तुम को कैसे पता चला ?" उसने कहा- "रानी साहिबा का नौकरों के साथ सुलूक गँवारों से भी बुरा हैं। एक खानदानी इंसान का दूसरों से व्यवहार करने का एक तरीका होता हैं, जो रानी साहिबा में बिल्कुल नही। राजा फिर उसकी पारखी नज़रों से खुश हुआ और बहुत से अनाज, भेड़ बकरियां बतौर इनाम दीं साथ ही उसे अपने दरबार मे तैनात कर दिया। 

         कुछ वक्त गुज़रा, राजा ने फिर नौकर को बुलाया, और अपने बारे में पूछा। नौकर ने कहा- "जान की सलामती हो तो कहूँ।" राजा ने वादा किया। 

        उसने कहा- "न तो आप राजा के बेटे हो और न ही आपका चलन राजाओं वाला है।" राजा को बहुत गुस्सा आया, मगर जान की सलामती का वचन दे चुका था, राजा सीधा अपनी माँ के महल पहुँचा। 

         माँ ने कहा- "ये सच है, तुम एक चरवाहे के बेटे हो, हमारी औलाद नहीं थी, तो तुम्हें गोद लेकर हम ने पाला।" 

         राजा ने नौकर को बुलाया और पूछा- बता, "तुझे कैसे पता चला ?" उसने कहा- "जब राजा किसी को इनाम दिया करते हैं, तो हीरे मोती और जवाहरात की शक्ल में देते हैं। लेकिन आप भेड़, बकरियां, खाने पीने की चीजें दिया करते हैं। ये रवैया राजाओं का नही, किसी चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है।"

          इंसान के पास कितनी धन दौलत, सुख समृद्धि, रुतबा, इल्म, बाहुबल हैं ये सब बाहरी दिखावा है। इंसान की असलियत की पहचान उसके व्यवहार और उसकी नीयत से होती है।

आभार:

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