सच्चाई दिखाती कविता। Hindi poem

"मन्दिर लगता आडंबर ,  और मदिरालय में खोए हैं ," "भूल गए कश्मीरी  पंडित ,  और अफजल पे रोए हैं........" "इन्हें गोधरा नहीं दिखा ,  गुजरात दिखाई देता है ," "एक पक्ष के लोगों का ,  जज्बात दिखाई देता है........" "हिन्दू को गाली देने का ,  मौसम बना रहे हैं ये ," "धर्म सनातन पर हँसने को ,  फैशन बना रहे हैं ये......." "टीपू को सुल्तान मानकर ,  खुद को बेच कर भूल गए ," "और प्रताप की खुद्दारी की ,  घास की रोटी भूल गए......." "आतंकी की फाँसी इनको ,  अक्सर बहुत रुलाती है ," "गाय माँस के बिन भोजन की ,  थाली नहीं सुहाती है......." "होली आई तो पानी की ,  बर्बादी पर ये रोते हैं ," "रेन डाँस के नाम पर ,  बहते पानी से मुँह धोते हैं........" "दीवाली की जगमग से ही ,  इनकी आँखें डरती हैं ," "थर्टी फर्स्ट की आतिशबाजी ,  इनको क्यों नहीं अखरती है......." "देश विरोधी नारों को ,  ये आजादी बतलाते हैं ," "राष्ट्रप्रेम के नायक संघी ,  इनको नहीं सुहाते हैं...........

वाजपेई जी और कलाम जी। Atal Bihari Vajpayee Ji and APJ Abdul Kalam ji

डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम अपनी किताब ''दि टर्निग प्वाइंट'' में एक महत्वपूर्ण प्रसंग का जिक्र करते हुए लिखते हैं

मैं उस दिन अन्ना युनिवर्सिटी में क्लास लेने के बाद कैन्टीन में अपने साथी प्रोफेसरों के साथ चाय पी रहा था, तभी किसी ने कहा कि आपका एक जरूरी फोन आया है। मैंने फोन अटेंड किया तो दूसरी तरफ से आवाज आई कि डॉ. कलाम मैं PMO से बोल रहा हूँ। प्रधानमंत्री आपसे बात करना चाह रहे हैं। 10 मिनट बाद आपको फिर फोन आएगा। कृपया अटेंड कीजियेगा।

डॉ. कलाम आगे लिखते हैं  कि "वो 10 मिनट बड़ी मुश्किल से बीते। पता नहीं PM साहब क्या बात मुझसे करना चाहते हैं। तभी फोन आ गया कि डॉ. कलाम आप लाइन पर रहें। PM साहब आपसे बात करेंगे। और उसके बाद एक भारी आवाज सुनाई पड़ी, 'डॉ. कलाम मैं अटल बिहारी वाजपेयी बोल रहा हूँ। कैसे हैं आप!'

मैंने नमस्कार करते हुए कहा कि सर मै ठीक हूँ। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम आपने देश की बहुत सेवा की है। लेकिन मैं आपको और बड़ी जिम्मेदारी देना चाहता हूँ। मना मत कीजिएगा। हम चाहते हैं कि आप देश के अगले राष्ट्रपति बनें।"

सुनकर मैं नर्वस हो गया और कहा कि सर मुझसे नही हो पाएगा।

PM ने कहा कि आप समय ले लीजिए। अपने दोस्तों से बात कीजिए। मैं आधे घंटे बाद आपको फिर काॅल करूंगा और आपका उत्तर हाँ होना चाहिए।

'कलाम साहब लिखते हैं कि' यह सुनकर मैं बहुत बड़ी दुविधा में पड़ गया। क्या जवाब दूं।

मैं अपने मित्रों से बात करने कैन्टीन गया और सारी बात बताई। दोस्तों ने सुनते ही कहा कि इसमें ज्यादा सोचने की कौन सी बात है। तुम तुरंत हाँ कहो।

खैर ठीक आधे घंटे के बाद फिर फोन आया।

PM साहब ने कहा कि "तो डॉ. कलाम क्या सोचा है आपने?"

मैंने कहा कि सर मुझे पढ़ान बहुत अच्छा लगता है। मैं इसे छोड़ नही सकता।

उन्होंने कहा कि पढ़ान आपका शौक है तो पढाइए न। कौन रोक रहा है आपको। राष्ट्रपति रहकर भी आप पढ़ा सकते हैं।

तब मैंने हामी भरी और उसके आधे घंटे बाद एस पी जी के अधिकारियो ने पूरे कैंपस को चारों ओर से घेर लिया।

मैं आम से खास हो गया।

आधे घंटे के बाद मैं विशेष विमान से दिल्ली के लिए रवाना हो गया।"

ये थे स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी  साहब और यूँ मिला देश को डॉ. कलाम जैसा  बेहतरीन 'जनता का राष्ट्रपति'।

आभार:



            

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