वाजपेई जी और कलाम जी। Atal Bihari Vajpayee Ji and APJ Abdul Kalam ji
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डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम अपनी किताब ''दि टर्निग प्वाइंट'' में एक महत्वपूर्ण प्रसंग का जिक्र करते हुए लिखते हैं
मैं उस दिन अन्ना युनिवर्सिटी में क्लास लेने के बाद कैन्टीन में अपने साथी प्रोफेसरों के साथ चाय पी रहा था, तभी किसी ने कहा कि आपका एक जरूरी फोन आया है। मैंने फोन अटेंड किया तो दूसरी तरफ से आवाज आई कि डॉ. कलाम मैं PMO से बोल रहा हूँ। प्रधानमंत्री आपसे बात करना चाह रहे हैं। 10 मिनट बाद आपको फिर फोन आएगा। कृपया अटेंड कीजियेगा।
डॉ. कलाम आगे लिखते हैं कि "वो 10 मिनट बड़ी मुश्किल से बीते। पता नहीं PM साहब क्या बात मुझसे करना चाहते हैं। तभी फोन आ गया कि डॉ. कलाम आप लाइन पर रहें। PM साहब आपसे बात करेंगे। और उसके बाद एक भारी आवाज सुनाई पड़ी, 'डॉ. कलाम मैं अटल बिहारी वाजपेयी बोल रहा हूँ। कैसे हैं आप!'
मैंने नमस्कार करते हुए कहा कि सर मै ठीक हूँ। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम आपने देश की बहुत सेवा की है। लेकिन मैं आपको और बड़ी जिम्मेदारी देना चाहता हूँ। मना मत कीजिएगा। हम चाहते हैं कि आप देश के अगले राष्ट्रपति बनें।"
सुनकर मैं नर्वस हो गया और कहा कि सर मुझसे नही हो पाएगा।
PM ने कहा कि आप समय ले लीजिए। अपने दोस्तों से बात कीजिए। मैं आधे घंटे बाद आपको फिर काॅल करूंगा और आपका उत्तर हाँ होना चाहिए।
'कलाम साहब लिखते हैं कि' यह सुनकर मैं बहुत बड़ी दुविधा में पड़ गया। क्या जवाब दूं।
मैं अपने मित्रों से बात करने कैन्टीन गया और सारी बात बताई। दोस्तों ने सुनते ही कहा कि इसमें ज्यादा सोचने की कौन सी बात है। तुम तुरंत हाँ कहो।
खैर ठीक आधे घंटे के बाद फिर फोन आया।
PM साहब ने कहा कि "तो डॉ. कलाम क्या सोचा है आपने?"
मैंने कहा कि सर मुझे पढ़ान बहुत अच्छा लगता है। मैं इसे छोड़ नही सकता।
उन्होंने कहा कि पढ़ान आपका शौक है तो पढाइए न। कौन रोक रहा है आपको। राष्ट्रपति रहकर भी आप पढ़ा सकते हैं।
तब मैंने हामी भरी और उसके आधे घंटे बाद एस पी जी के अधिकारियो ने पूरे कैंपस को चारों ओर से घेर लिया।
मैं आम से खास हो गया।
आधे घंटे के बाद मैं विशेष विमान से दिल्ली के लिए रवाना हो गया।"
ये थे स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी साहब और यूँ मिला देश को डॉ. कलाम जैसा बेहतरीन 'जनता का राष्ट्रपति'।
आभार:
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