सच्चाई दिखाती कविता। Hindi poem
"मन्दिर लगता आडंबर , और मदिरालय में खोए हैं ," "भूल गए कश्मीरी पंडित , और अफजल पे रोए हैं........" "इन्हें गोधरा नहीं दिखा , गुजरात दिखाई देता है ," "एक पक्ष के लोगों का , जज्बात दिखाई देता है........" "हिन्दू को गाली देने का , मौसम बना रहे हैं ये ," "धर्म सनातन पर हँसने को , फैशन बना रहे हैं ये......." "टीपू को सुल्तान मानकर , खुद को बेच कर भूल गए ," "और प्रताप की खुद्दारी की , घास की रोटी भूल गए......." "आतंकी की फाँसी इनको , अक्सर बहुत रुलाती है ," "गाय माँस के बिन भोजन की , थाली नहीं सुहाती है......." "होली आई तो पानी की , बर्बादी पर ये रोते हैं ," "रेन डाँस के नाम पर , बहते पानी से मुँह धोते हैं........" "दीवाली की जगमग से ही , इनकी आँखें डरती हैं ," "थर्टी फर्स्ट की आतिशबाजी , इनको क्यों नहीं अखरती है......." "देश विरोधी नारों को , ये आजादी बतलाते हैं ," "राष्ट्रप्रेम के नायक संघी , इनको नहीं सुहाते हैं...........